मेरी कलम से.. #02 Most Amazing Post 2024

मेरी कलम से.. #02 Most Amazing Post 2024

भूला कर भी सनम तुझको ,

भूला कर भी सनम तुझको ,

न इक पल भी भुला पाया |
न इक पल को मिले थे तुम,

न इक पल को मिला था मैं |
मगर एहसास बन हरपल ,

मेरे दिल को धडकाया |
मेरी तनहायी में भी तुम ,

भरी महफ़िल में भी तुम हो |
ये कैसी दिल्लगी तुमसे ,

खुदा भी न समझ पाया ||

आकाश त्रिपाठी

मेरी कलम से.. #02 Most Amazing Post 2024

मेरी दस बात पे, इक बात तेरा कह देना,
मुझको मजबूर यही बार-बार करती है |
तेरा फिर लफ़्ज़ मिले इक बार ज़रा सुनने को,
इसी चाहत में मेरे लब, सौ बात किया करती है |

नज़रंदाज़ न करो, यूँ ही मेरी मोहब्बत को
मैं कोई आवारा नहीं , मैं तो तेरा दीवाना हूँ
तेरी चाहत में सारी रात-रात जगता हूँ
तू मेरी चाँद, मैं तेरा चकोर मस्ताना  हूँ

देखो न ऐसे मुझे, चंचल बड़ी निगाहों से
तेरी नजरें शिकार, मेरा बार-बार करती है
तेरा फिर लफ़्ज़ मिले इक बार ज़रा सुनने को,
इसी चाहत में मेरे लब, सौ बात किया करती है |

मेरी दस बात पे, इक बात तेरा कह देना,
मुझको मजबूर यही बार-बार करती है |

आकाश त्रिपाठी
मेरी कलम से.. #02 Most Amazing Post 2024

है बात बहुत इस दिल में दबी ,
क्या बात कहूँ , क्या जाने दूँ ..
आँखों से समझलो, तो अच्छा है,
या बोलो तो, जुबाँ पर आने दूँ |

शायद, शब्दों में बयां मैं कर न सकूँ,
अपने दिल की गहरायी को..
एहसास करो तुम प्यार मेरा,
समझो न, मेरी तनहायी को..

एेसे गुमशुम सी तुम न रहो,
बोलो न सनम, कुछ बोलो न..
मैं तो थोड़ा सा पागल हूँ,
छोडो भी ये बातें, छोडो न..

आकाश त्रिपाठी

मेरी कलम से.. #02 Most Amazing Post 2024
इक बात थी तुमसे, कुछ कहनी
इकरार करो, न रूठोगी मगर
दिल की बातें, कुछ दिल में हैं
आ जाये जुबां पर, बात अगरअच्छी हो तुम , सच्ची हो तुम
पर समझ की थोडी, कच्ची हो
कोई बिन बोले प्यार करे
पर बोलो क्या तुम, बच्ची हो ?कैसे मैं सूनाऊँ, हाले ज़िगर
मैं यार बहुत शर्माता हूँ
कहना तो चाहूँ होंठों से
पर आँखों से ही कह पाता हूँकह दूंगा तुमसे, सब बातें
इकरार करो, न रूठोगी मगर
दिल की बातें, कुछ दिल में हैं
आ जाये जुबां पर, बात अगरइक बात थी तुमसे, कुछ कहनी..

 -आकाश त्रिपाठी
मेरी कलम से.. #02 Most Amazing Post 2024

गुनाह हो गया है, इज़हार करना
हुई है मोहब्बत , मुझे माफ करना
समझा है सब ने, सच को भी झूठा
क्योंकी सच ही जता कर, है लोगों ने लूटा

है दिल में मोहब्बत, उसके लिए पर
मैं कैसे कहूँ, जो समझे मुझे वो
डरता हूँ, कहीं रूठ जाये न मुझसे
इज़हार दिल का, किया मैं अगर तो

वो मिल जाये मुझको, तो पलकों पे सजा लूँ
दुल्हन बना कर, उसे दिल मे बसा लूँ
अपनी ख़ुशी सारी, उसपे लुटा दूँ
हर इक गमों को मैं, उससे चुरा लूँ

पर गुनाह हो गया है, इज़हार करना
हुई है मोहब्बत, मुझे माफ करना…

-आकाश  त्रिपाठी

मेरी कलम से.. #02 Most Amazing Post 2024

वो भी एक दौर था..
जब माँ के आँचल में आकर, हम छुप जाया करते थे |
वो भी एक दौर था..
जब अपनी तोतली भाषा में, माँ को समझाया करते थे |
वो भी एक दौर था..
जब लगा कर माथे पर काज़ल, माँ मुझको चूमा करती थी |
वो भी एक दौर था..
जब लगा कर अपने सीने से, माँ मुझको घूमा करती थी |

हर उस एक-एक दौर को, हम यूँ ही भूला दें फिर कैसे
जो हरपल मेरी फिक्र में, खुद को भूलाया करती थी |
हम यूँ ही भूला दें फिर कैसे ..
जो गीले बिस्तर पर सो कर , सूखे पर सुलाया करती थी |

पल भर को नज़र ना अाऊं जो, तो वो घबराया करती थी |
मिल जाता था जब माँ को मैं, सीने से लगाया करती थी |
हैं बचपन की वो सब यादें, जो दिल में बसाये रखा हूँ |
हे माँ तू मेरी जन्नत है, तुझे पलकों पे साजये रखा हूँ |

-आकाश त्रिपाठी

मेरी कलम से.. #02 Most Amazing Post 2024
काश समझ पाती तुम, मेरी बेचैनी की वो रातें ..
जो मैं तारें गिन गिन, तेरी याद में जागा करता था ।
काश समझ पाती तुम, मेरी नजरों की वो बातें ..
जो मैं कभी तुझसे, शब्दों में कहने से डरता था ।
काश समझ पाती तुम, मेरे दिल की उस धडकन को ..
जिसकी हर धक्-धक् में, तेरा नाम ही गूंजा करता था ।
काश समझ पाती तुम, मेरे उस दीवानेपन को ..
जो मैं दीवाना तेरी गलियों में, अक्सर घूमा करता था ।
पर नादान थी तू, नासमझ थी तू, पहली पहली जो बार हुआ..
तेरी कातिल नजरों से था, पहली बार शिकार हुआ ।
अब तो तेरी नजरों के, ना जाने कितने घायाल होंगे ..
मान लूँ  कैसे मैं ये की, मुझको ही तुझसे प्यार हुआ ।
काश समझ पाती तुम मुझको, मजबूर नहीं फिर मैं होता..
काश ना देती ठोकर मुझको, दूर नहीं फिर मैं होता ।
तेरे नाजुक से दिल को भी, कोई ठेश ना लगने देता मैं ..
हम दोनो के दामान खुशियां होती, मैं तनहाई में ना रोता ।।
काश समझ पाती तुम मुझको…
-आकाश  त्रिपाठी
मेरी कलम से.. #02 Most Amazing Post 2024
आप की हर बात का, इंतजार रहता है मुझे..
आप की हर बात का, एहसास रहता है मुझे |
क्या करूँ तन्हाई में, अब दिल नहीं लगता..
हरपल तुम्हें बस देखने का ख्वाब रहता है मुझे ||
– आकाश त्रिपाठी
मोहब्बत की कुछ बूंदें, यूँ  ही लुटा देता हूँ मैं..
उसके हर सितम को, हस कर भुला देता हूँ मैं |
माना की उसे गुरूर है, अपने हसीं होने का..
दिल की प्यारी बातों से, दिल फिर भी चुरा लेता हूँ मैं ||
– आकाश त्रिपाठी
मेरी कलम से.. #02 Most Amazing Post 2024

अक्सर दिल में न जाने क्यूँ, एक सवाल आता है।
आखिर क्यूँ उसका ख्याल, बार -बार आता है ?
न मैं जानता हूँ उसको, न मेरा उससे कोई नाता है।
आखिर क्यूँ उसका ख्याल, बार-बार आता है ?

बस एक ही बार तो मिले थे हम, बस एक ही बार तो देखा था।
फिर भी ऐसा क्यूँ लगता है, कि जन्मों-जन्मों का नाता है।
आखिर क्यूँ उसका ख्याल, बार-बार आता है ?

गर मिलेगी मुझसे फिर वो कभी, तो उससे मैं ये पूँछूँगा।
क्या उसको भी, मेरा चेहरा, सारी रात जगाता है ?
आखिर क्यूँ उसका ख्याल, बार-बार आता है ?

अक्सर दिल में न जाने क्यूँ, एक सवाल आता है।
आखिर क्यूँ उसका ख्याल, बार -बार आता है ?

-आकाश त्रिपाठी

मेरी कलम से.. #02 Most Amazing Post 2024

बस इल्ज़ाम लगते हैं,

क्यों हूँ बदला मैं, नहीं समझता कोई।
बस हंसी दिखती है,
घाव गहरे हैं कितने, नहीं समझता कोई।

गिला गैरों से भला करें तो करें कैसे,
जब अपने ही मुझे अपनों में, नहीं  गिनता कोई।

महफ़िलों में तो मैं हँसता हुआ नज़र आया..
पर कितना बिखरा हूँ, नहीं समझता कोई।

बस इल्ज़ाम लगते हैं,
क्यों हूँ बदला मैं, नहीं समझता कोई।

मेरी कलम से.. #02 Most Amazing Post 2024

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